अल्लाह न देखा न देखा है भगवान,
पर जातिवाद के लिए देखा है जलता हिंदुस्तान!
मैं हूँ मुस्लिम मैं हूँ हिंदू,
अपने ही रंगों में बट गया है आवाम!
कयूँ रचाई कृष्ण ने लीला,
जब वो कर न सकी मानवता का उत्थान!
पढ़कर भी कुरान की आयतें,
क्यूँ करते हो कत्ले आम!
खून के भी रंग बनाये,
और अपने रंग पर है सबको अभिमान!
क्या मिला भगवान बना कर,
जब ख़ुद ही बन गए शैतान!
अल्लाह न देखा भगवान न देखा,
पर जातिवाद के लिए देखा है जलता हिंदुस्तान!
Wednesday, July 29, 2009
Thursday, July 23, 2009
गली गली में शोर है!
गली गली में शोर है,
समलैंगिकता का जोर है!
दिल्ली हाई कोर्ट के दब दबे में,
गे कम्युनिटी का ज़ोर है!
खुले विचारों की भोर है,
सब को अपनाने की होड़ है!
सास बहु के झंझट छुटे
सतीप्रथा की तोड़ है!
गे मैरिज़ का नया दौर है,
पंडितों का जीवन कठोर है!
बने बाराती या बहाए डोली के आंसू,
माँ बाप की चिंता ही कुछ ओर है!
अजी गली गली में शोर है,
समलैंगिकता का ज़ोर है!
समलैंगिकता का जोर है!
दिल्ली हाई कोर्ट के दब दबे में,
गे कम्युनिटी का ज़ोर है!
खुले विचारों की भोर है,
सब को अपनाने की होड़ है!
सास बहु के झंझट छुटे
सतीप्रथा की तोड़ है!
गे मैरिज़ का नया दौर है,
पंडितों का जीवन कठोर है!
बने बाराती या बहाए डोली के आंसू,
माँ बाप की चिंता ही कुछ ओर है!
अजी गली गली में शोर है,
समलैंगिकता का ज़ोर है!
Wednesday, July 22, 2009
उडान उम्मीद की

दिल चला है , दिल चला है !
अंजान मंजिलों के सफर पर निकल पड़ा है !
आसमां को पाने की चाह में ,
पंख पसारे तैयार खड़ा है!
तोड़ के बन्धनों के पिंजरे ,
आजाद गगन में उन्मुक्त उडा है!
छु पाए न दर्द की परछाई जहाँ पर ,
उन उचाइयों के सफर पर निकल पड़ा है!
इतिहास की परछाई छोडे
खुशियों के उजाले ढूंढे पड़ा है!
उठती गिरती भावनाओं के भवर से,
बहार आने को लड़ रहा है!
उज्जवल भविष्य की उम्मीद के तिनके,
संभाले तूफानों में भी बढ़ रहा है!
मिलेगी इसे भी रहा कभी तो,
इस ख्याल में अडा हुआ है!
दिल चला है , दिल चला है!
अंजान मंजिलों के सफर पर निकल पड़ा है!
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